श्री शिवकुमार मिश्र , आलोचना
"प्रेमचंद और प्रसाद की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले जिन पुराने और नए लेखकों ने कथा - कहानियों के क्षेत्र को समृद्ध किया है, कथाकारों की उसी पंक्ति में हम प्रस्तुत कहानी संग्रह की लेखिका श्रीमती स्वरुप कुमारी बक्शी को भी रखते है।"
श्री शिवनाथ काटजू , अमृत बाजार पत्रिका
"ये कहानियाँ मनोरंजन के साथ ही पाठक की जिज्ञासा तथा कल्पना शक्ति के स्तर को उन्नत करती हैं।"
श्री कृष्णा टंडन आकाशवाणी लखनऊ।
" हम स्वरुप कुमारी बक्शी के रूप में दुर्बलताओं के उन्मूलन की भावना से प्रेरित उपेक्षित जन जीवन के प्रति सहृदयतापूर्ण , प्रत्येक नयी जागरूक प्रतिभा का सहर्ष स्वागत करते है। "
श्री शिव शंकर मिश्र , उ. प्र. पंचायती राज।
" इस संग्रह की सभी कहानियाँ सुन्दर हैं और कुछ में असाधारण उत्कृष्टता है। "
श्री यशपाल , युग चेतना, लखनऊ।
"कहानियों के वर्णन में नाच का चुलबुलापन और कौड़ियों की खनक मौजूद है। कौड़ियों के इस नाच में दांव निश्चय ही स्वरुप कुमारी बक्शी का हाथ लगा है। "